मैं बोझ बन जाऊ़गा एक दिन अपने ही दोस्तों पर,
कांधे वदल रहे होंगे वो.. हर दो क़दम के बाद..!!
मुझे नहीं आती हैं, उड़ती पतंगों सी चालाकियां,
गले मिलकर गला काटूं, वो मांझा नहीं हूँ मै।
हमारी दुनिया दौलत और मौत का वह चक्रव्यूह है,
जिस में एक बार दाखिल हो जाओ, तोह कोई वापसी नहीं।
मौसम की पहली बारिश का शौक तुम्हें होगा,
हम तो रोज किसी की यादो मे भीगें रहते है।
मैं निकला सुख की तलाश में रस्ते में खड़े दुखो ने कहा,
हमें साथ लिए बिना सुखों का पता नहीं मिलता जनाब।
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