इतना बतला के मुझे हरजाई हूँ मैं यार कि तू,
मैं हर इक शख्स से रखता हूँ सरोकार के तू..
मैं हर इक शख्स से रखता हूँ सरोकार के तू..
कम-सबाती मेरी हरदम है मुखातिब ब-हबाब,
देखें तो पहले हम उस बहर से हों पार के तू..
देखें तो पहले हम उस बहर से हों पार के तू..
ना-तवानी मेरी गुलशन में ये ही बहसें है,
देखें ऐ निकहत-ए-गुल हम हैं सुबुक-बार के तू..
देखें ऐ निकहत-ए-गुल हम हैं सुबुक-बार के तू..
दोस्ती कर के जो दुश्मन हुआ तू जुरअत का,
बे-वफा वो है फिर ऐ शोख सितम-गार के तू।
बे-वफा वो है फिर ऐ शोख सितम-गार के तू।
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