मोहब्बत उसे भी बहुत है मुझसे
जिंदगी.. सारी इस वहम ने ले ली।
मरहम की ज़रूरत नहीं है मुझको,
जख्म देखकर कम से कम हाल तो पूछ लिया करो।
मैंने दरवाज़े पे ताला भी लगा कर देखा है,
ग़म फिर भी समझ जाते है की मैं घर में हूँ।
तेरी याद क्यों आती है, ये मालूम नहीं,
लेकिन जब भी आती है बहुत अच्छा लगता है।
उम्र तक कट गयी लोगों को मनाते हुए,
अब इरादा सबसे रूठ जाने का है।
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